बुधवार, 7 अप्रैल 2010

कहां है, डॉ विनायक सेन से लेकर मेधा पाटकर और मानवाधिकार के नाम का रोना रोने वाले/वाली रूदालियां? और कहां है नक्सलवाद की रुमानियत में डूबी अरुंधती रॉय साहिबा?

Sanjeet Tripathi - Buzz - Public - Muted
बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में नक्सल विस्फोट में 75 से ज्यादा जवान शहीद, कई घायल,कई लापता। अब तक की सबसे बड़ी घटना। नमन शहीदों को। लेकिन कहां है, डॉ विनायक सेन से लेकर मेधा पाटकर और मानवाधिकार के नाम का रोना रोने वाले/वाली रूदालियां? और कहां है नक्सलवाद की रुमानियत में डूबी अरुंधती रॉय साहिबा?Edit
1 person liked this - प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
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Akhil Tiwari - sab saale dramabaaz hain..6:27 pmDeleteUndo deleteReport spamNot spam
shyam jagota - unke liye to 'SMALL THINGS" hain bhai !!!6:30 pmDeleteUndo deleteReport spamNot spam
NADEEM AKHTAR - देखिये बुद्धिजीवियों का जो काम है, वो कर रहे हैं। अगर डॉ विनायक सेन गरीबों-आदिवासियों को मलेरिया से मुक्ति दिलाने के लिए जंगलों की खाक छानते हैं, तो वो कहां से गलत हो गये। अरुंधति राय अगर एक नक्सली दस्ते की अंदुरूनी हकीकत लोगों तक पेश करने के लिए कैंपों की खाक छानती हैं, तो वो कहां से गलत हो गयीं और अगर मेधा पाटकर या फिर अपर्णा सेन नक्सलियों और सरकार के बीच सेतु बनना चाहती हैं, तो वो कैसे गलत हैं। सवाल यह है कि जिन लोगों ने जवानों को मार गिराया है, उनके पास इस बर्बर कार्रवाई के लिए भले ही अपने तर्क हों, लेकिन एक समाज जो हाशिये के ऊपर है, उसकी नज़रों में यह गलत हो सकता है। हमें सिक्के के दोनों पहलुओं पर गौर करना चाहिए, न कि केवल एक ओर ही देखकर निष्कर्ष निकालना चाहिए।6:46 pmDeleteUndo deleteReport spamNot spam
Dr. Mahesh Sinha - ये एक और तथाकथित आ गए, याने पाकिस्तान भी जो कर रहा है ठीक कर रहा है7:40 pmDeleteUndo deleteReport spamNot spam
HIMANSHU MOHAN - बात नज़रिये की है तो पहला मुद्दा ये है कि हिंसा का समर्थन करने वाला हर तर्क ग़लत ही होता है। हिंसा से हट कर ही दूसरे पहलुओं पर बात हो सकती है, हत्यारों से नहीं।7:51 pmDeleteUndo deleteReport spamNot spam
Sameer Lal - शहीदों को नमन!!7:51 pmDeleteUndo deleteReport spamNot spam
HIMANSHU MOHAN - शहीदों को श्रद्धांजलि और नमन।7:51 pmDeleteUndo deleteReport spamNot spam
Mangal Senacha - मंगल सैणचा परिवार की और से शहीदों को श्रद्धांजलि और नमन।7:52 pmDeleteUndo deleteReport spamNot spam
Gyan Dutt Pandey - What Sanjeet is saying is perfectly valid. The pseudo-intellectuals must condemn the barbaric killing of the CRPF personnel. Else how they talk of human rights of people. Terror is terror, and it can not be glorified by the likes of Mr Nadeem.
75 Jawans are killed and we are asked to look at the other side of the Coin! Nadeem probably does not need to have a family member in CRPF or Army. :-(
7:59 pmDeleteUndo deleteReport spamNot spam
shyam jagota - ve tathakathit manavadhikaar ke doot tab uthte hain jab police ki goli se koi maara jata hai8:03 pmDeleteUndo deleteReport spamNot spam
Sanjeet Tripathi - नदीम जी, इससे पहले कि मैं आपकी बात का जवाब देता
ज्ञानदत्त जी क जवाब पढ़ा मैने। वैसे नदीम जी आप मुझे छत्तीसगढ़ में विनायक सेन जी के किए गए कामों की लिस्ट उपलब्ध करवा सकें तो आभारी रहूंगा।
इसी तरह हमने देखा है, मेधा पाटकर और अरूंधती रॉय समेत
कई बड़े नाम रायपुर से लेकर बस्तर आते हैं तो नक्सलियों के खिलाफ
चलाए जा रहे अभियान को बंद करने की मांग करते हैं
मानवाधिकार की दुहाई देते हैं। पर आश्चर्य यही नाम एक बार भी
नक्सल हिंसा का विरोध करते दिखाई नहीं देते, आप कारणों पर
कुछ प्रकाश डाल सकेंगे?
Edit8:41 pm
Sanjeet Tripathi - और हां , क्या बुद्धिजीवियों का बस यही काम है कि वे नक्सलियों पर
किए जाने वाली पुलिसिया हिंसा का तो विरोध करें लेकिन नक्सलियों द्वारा आज की तरह की जाने वाली हिंसा पर अपना मुंह सीलबंद कर लें?
Edit8:43 pm
11 previous comments from Akhil Tiwari, shyam jagota, NADEEM AKHTAR and 6 others
Dr. Mahesh Sinha - @ nadeem
डॉ विनायक सेन के इतिहास पर भी प्रकाश डालें . ये यहाँ कहाँ से अवतरित हुए और क्यों ?
8:49 pmDeleteUndo deleteReport spamNot spam
shyam jagota - संजीत जी ये वही अरुंधती जी हैं जो कश्मीर को आजाद करने का ब्यान भी देचुकी हैं इनहे बटाला हाउस
जैसे मसाले की तलाश रहती है
9:19 pmDeleteUndo deleteReport spamNot spam
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI - हिंसा को लेकर तथाकथित मानवाधिकार कार्यकर्ता संदेह के घेरे में हैं |
आखिर व्यवष्ठ को लेकर सामजिक हिंसा को जायज ठहराने वाले इन हत्याओं के समय अपने होठों को क्यों सिले रखते हैं? कहीं इनको मिल्राही आर्थिक सहायताएं ....एक कारण तो नहीं !
नक्सलवाद अब नासूर बन चुकाहै और इस नासूर को खत्म करने का साहस राजनैतिक सता दिखा नहीं पा रही है ............ शायद नक्सलवादियों के हौंसले इसीलिए इतने बुलंद हैं?
9:35 pmDeleteUndo deleteReport spamNot spam
Dineshrai Dwivedi - बड़े भाई, नक्सलवाद को नासूर किसने बनाया? उन्हीं डाक्टरों ने जो बीमारी का इलाज करने के बजाए लक्षणों को दबाने का काम करते रहे। जितने हथियार पुलिस से छिने हैं। उन में से कितने बेच दिए गए हैं इस का पता करें। नक्सलवाद नेताओं और नौकरशाही के लिए कमाई का जरिया तो नहीं बन गया है, इस की भी पड़ताल करें।

9 टिप्‍पणियां:

aarya ने कहा…

सादर वन्दे!
कौन कहता कि ये बुद्धिजीवी हैं, अरे ये तो बिदेशी पैसे पर पालने वाले पामेलियन हैं जो उन्ही के लिए भोकते हैं.
एक बात और मोमबत्तियां जलने वालो अब कहाँ गयीं तुम्हारी मोमबत्तियां.
रत्नेश त्रिपाठी

Anil Pusadkar ने कहा…

रो रहे होंगे रूपये लेकर शायद सानिया के घर पर.

ePandit ने कहा…

नक्सली जवानों को गाजर-मूली की तरह काट रहे हैं और सरकार हिजड़ों की तरह बैठी हुयी है। देश के दुर्भाग्य की पराकाष्ठा है ये।

मिहिरभोज ने कहा…

कहीं और हत्यारों के लिए जमीन तैयार कर रहे होंगै.......

Suman ने कहा…

nice

वीरेन्द्र जैन ने कहा…

मुझे लगता है कि लोकतंत्र ही सर्वोत्तम है, बशर्ते कि वह हो, उसकी अनुपस्थिति ही हिंसा को जन्म देती है। जो लोग साम्प्रदायिकता, जातिवाद, वंशवाद, लोक्प्रिय नाम, धन के प्रवाह, बाहुबल सामंतवाद आदि अदि कारकों से लोकतंत्र को अनुपस्थित करने का काम कर रहे हैं वे ही हिंसा को पैदा कर रहे हैं. शासन प्रशासन से लेकर न्याय और फौज़ तक में जो भ्रष्टाचार छा गया है वह ही इसके लिए ज़िम्मेवार है। इस हिंसा का प्रतिकार करने का सबसे अच्छा तरीका यही होगा कि हम लोकतंत्र को वापिस लने का प्रयास करें

युवराज गजपाल ने कहा…

aarya ki baat se sahamat .. shayad ye rudaliyan abhi diye jala rahi hongi ..

Vinay Pusadkar ने कहा…

I dont think all the demands of the terrorist of "Red Peril" are incorrect. But the way they are following for the fulfillments of their demand in totaly incorrect.No one should support it.

But this issue arises question that the weapons are being supplied in the interior part of country. can't we stop it?

Vinay Pusadkar ने कहा…

khun ki nadiya bahane se nahi, logo ke man me wishwas paida kar ke hi samasya ka hal nikala ja sakta hai!!!

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